इस वर्ष स्वास्थ्य मंत्रालय की निगरानी में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाले प्रोजेक्ट ने एक नविन दवा की खोज की, जिसका असर ट्यूमर पर विशेष रूप से प्रबल दिखा है। शोध टीम ने बताया कि यह दवा सेल के भीतर विशिष्ट एंजाइम को ब्लॉक करके कैंसर कोशिकाओं को मारती है जबकि स्फूर्तिक स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखती है।
क्लिनिकल ट्रायल के प्रारंभिक चरण में रोका रोकथाम और उपचार के लिए दवा का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 78% रोगियों में ट्यूमर का आकार कम हुआ और 65% में रोग की प्रगति रुक गई। रोगी-केंद्रित फीडबैक भी संतोषजनक रहा, दुष्प्रभावों में हल्की जठरांत्रिक असुविधा से लेकर सामान्य थकान शामिल थे।
विज्ञान समुदाय में यह खोज नई संभावनाएँ खोल रही है: यह दवा न सिर्फ हार्ड टिश्यू कैंसर बल्कि रक्त एवं उन्नत इम्यूनोथेरपी के साथ भी संगत बनाई जा सकती है। शोधकर्ता आगे के चरणों में दवा के दीर्घकालिक उपयोग, आर्थिक व्यवहार्यता और वैश्विक पहुँच पर काम कर रहे हैं।

