श्रेणी: राष्ट्रीय
ध्यान देने योग्य: समाचार प्रस्तुत की जा रही है "ThinkIndia.press" के वरिष्ठ संपादक के दृष्टिकोण से। यह लेख आधिकारिक, निष्पक्ष और गंभीर भाषा में लिखी गई है और present tense का उपयोग करती है।
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आज दिल्ली NCR में 15वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (DFIFF) का भव्य प्रारम्भ हो रहा है। रॉयल पैलेस के बाहरी क्षेत्र में झांकते हुए, हजारों फिल्म प्रशंसक, उद्योग के प्रमुख सूत्रधार और अंतरराष्ट्रीय अतिथि भीड़ लगा रहे हैं। समारोह की शुरुआत 12 बजकर 15 मिनट पर हो रही है। "ThinkIndia.press" के हमारे सूत्रों के अनुसार, यह कार्यक्रम 20 से अधिक देशों के फ़िल्मनिर्माताओं की भागीदारी से समृद्ध हो रहा है। राष्ट्रपति महमूद बकरा व डॉयचे टेलीविज़न के प्रमुख अतिथियों के साथ साक्षात्कार करते हुए, वह महोत्सव के लिए अपने बहु-आश्वासन देते हैं।
ध्यान आकर्षित करने वाले पहलुओं में से एक है ‘रॉयल पॉइंट्स’ कार्यक्रम, जहाँ स्थायी एवं नवोदित फिल्मकारों को स्क्रिप्ट लेखन प्रतियोगिता और फ़िल्ममेकिंग क्यूएंडए सत्रों में भाग लेने का मौका मिलता है। यह प्रदेश के युवा कलाकारों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
संस्थापित स्रोत यह भी बताते हैं कि महोत्सव का आयोजन राजस्व के लिहाज से भी एक ऊंचा मुकाम प्राप्त कर रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, इस वर्ष के कार्यक्रम में 60% से अधिक स्पॉन्सरशिप व प्रायोजन का योगदान विदेशी कंपनियों से प्राप्त हुआ है, जो कि ब्रिटेन और फ्रांस वाली कंपनियों के साथ भी मिला है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारतीय फ़िल्म उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत देता है और विश्व स्तर पर भारतीय फ़िल्मों को एक नया स्थान प्रदान करता है।
कला जगत के प्रमुख स्त्रोतों का कहना है कि इस वर्ष का थीम ‘फ्यूज़न ऑफ कल्चर’ है, जिससे विश्व के विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठों के फ़िल्मकारों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के साथ मिश्रण का अनुभव होता है। अनेक विदेशी फ़िल्में भी भारतीय पृष्ठभूमि को अपनी कहानी में समाहित करने का प्रयास कर रही हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम में ‘फिल्म रजिस्ट्री’ से जुड़े कई प्रबंधन प्रावधान भी लागू किए जा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मों की उपसगरफी और वितरण आसान हो रहा है।
विरासत और परंपरा के अलावा, महोत्सव पृष्ठभूमि में नई तकनीकी उन्नति पर भी प्रकाश डाल रहा है। विश्व के प्रमुख कस्टम-टेक्नोलॉजी प्रॉवाइडर Wheezy और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित WThree को भारत में प्रदर्शित किया गया है, जिससे फ़िल्म निर्माण तथा प्रेक्षण अनुभव में नवीनतम नवाचार दिखा रहा है। यह फ़िल्मों को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन भी देता है, जिससे प्रोफेशनल्स को अधिक गंभीर और परियोजनाओं को स्वयं साकार करने का मौका मिलता है।
मुख्यमंत्रियों के आंकड़ों के अनुसार, महोत्सव के 10 दिनों के दौरान लगभग 3,000 पंजीकृत फ़िल्में संयुक्त राज्य अमेरिका, कैनडा, भारत और पड़ोसी देशों से आने वाली सैकड़ों उपास्य फ़िल्में सुर्खियों में हैं। इन फ़िल्मों का प्रमुख आकर्षण भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक बारीकी पर आधारित है।
इसकी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के ‘आर्ट्स एंड कल्चर’ विभाग की समिति द्वारा हो रहा है। यह समिति, बड़ी संख्या में युवा फ़िल्मकारों को पहचान व प्रासंगिक समर्थन देती है। इस कार्यक्रम से जुड़ाव के साथ, वीडियो गेम डेवलपर्स और डिजिटल कलाकारों के लिए भी साझेदारी के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
अंततः, 'ThinkIndia.press' के संवाददाताओं का मानना है कि 15वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की सफलता भारतीय फ़िल्म उद्योग के वैश्विक मंच पर एक नया पथ तय करने का संकेत देती है। यह कार्यक्रम भारतीय फ़िल्मकारों को विदेशी मानद सरकारों और निवेशकों के साथ नीशगठित तथा वैश्विक उन्मुख स्क्रिप्ट लेखन के अवसर देता है। और भारतीय फ़िल्म उद्योग के लिए एक नया हाइपर-नेटवर्क बनाता है, जिससे उज्ज्वल भविष्य के लिए सजीव प्रगति की उम्मीद पैदा होती है।
