**गढ़वा, ब्यूरो डेस्क |** आधुनिक होते समाज में आज भी कई जगह पुरानी परंपराएं और पाबंदियां युवाओं की जान पर भारी पड़ रही हैं। गढ़वा जिले में हाल ही में घटी कई घटनाएं इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि जब माता-पिता अपने बच्चों की खुशियों और भावनाओं को दरकिनार कर अपनी जिद थोपते हैं, तो इसके परिणाम कितने खौफनाक हो सकते हैं। आज के इस डिजिटल और मोबाइल युग में, जहां बच्चों की आंखें खुल चुकी हैं, उन्हें पुराने जमाने की तरह बांध कर नहीं रखा जा सकता।
### आखिर कब समझेंगे माता-पिता?
आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि माता-पिता अपनी झूठी शान और खुशी के लिए बच्चों का गला क्यों घोंटते हैं? अक्सर देखा जाता है कि जब बच्चे अपनी जान की बाजी लगा देते हैं—कोई फांसी का फंदा चूम लेता है, तो कोई मोबाइल टावर पर चढ़ जाता है—तब जाकर परिवार वाले झुकते हैं और मान जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि सब कुछ लुट जाने या ऐसी खौफनाक नौबत आने के बाद ही क्यों? पहले क्यों नहीं?
### स्नेहा और रूपेश का मामला: समाज के दबाव में टूटती सांसें
रमना में स्नेहा और रूपेश का मामला इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। स्नेहा, जो दिल से रूपेश को अपना पति मान चुकी है, उसने प्यार के लिए फांसी लगाने तक की कोशिश की। वह अपने प्यार के लिए तड़पी और रोई, लेकिन समाज और परिवार के भारी दबाव के कारण उनकी शादी नहीं हो पा रही है। अभी तक इस मामले में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। जब समाज और परिवार का ऐसा ही रवैया रहेगा, तो युवाओं को मौत को गले लगाना ही एकमात्र रास्ता नजर आता है। इस तरह के भारी दबाव किसी भी बच्चे को आत्महत्या जैसे दर्दनाक कदम की ओर धकेल सकते हैं।
### रमना और खरौंधी की घटनाएं: जबरन शादी का विरोध
स्नेहा और रूपेश का मामला कोई इकलौती घटना नहीं है। हाल ही में गढ़वा के रमना में एक लड़की की जबरन शादी कराई जा रही थी। लड़की की इच्छा नहीं थी, फिर भी परिवार वालों ने उसे जबरन मंडप तक पहुंचा दिया। लेकिन उस साहसी लड़की ने विवाह वेदी पर सिंदूर लेने से साफ इंकार कर दिया।
वहीं, खरौंधी में एक और हैरान करने वाला वाकया सामने आया। एक युवक अपने प्यार को पाने की जिद में मोबाइल टावर पर चढ़ गया और आत्महत्या की धमकी देने लगा।
### बदलने का वक्त आ गया है
ये तमाम घटनाएं समाज और खासकर माता-पिता के लिए एक सख्त चेतावनी हैं। जमाना बदल चुका है, और बच्चों की सोच भी। अब उन्हें प्यार और समझदारी से ही सही राह दिखाई जा सकती है, डरा-धमका कर या जबरदस्ती करके नहीं। अपनी झूठी प्रतिष्ठा के लिए बच्चों को मौत के मुहाने तक पहुंचाना कहां का न्याय है? समय रहते माता-पिता को यह समझना होगा कि उनके बच्चों की असली खुशी उनकी जिंदादिली में है, न कि किसी थोपी गई शादी में।
खरौंधी में प्रेम के लिए एक युवा का खौफनाक कदम: स्नेहा-रूपेश से लेकर टावर पर चढ़ने तक, आखिर कब समझेंगे माता-पिता?
ThinkIndia.press BureauNews Correspondent
15 जून 2026 को 07:43 am बजे•3 min read•
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