Home>News>jharkhand

सिलसिलेवार गिरफ्तारियाँ: OSD, बोर्ड अधिकारी, शिक्षक... पेपर लीक की जड़ तक पहुँची पुलिस

प्रिंटिंग प्रेस से मिले डिजिटल सुरागों ने जैसे-जैसे करवटें बदलीं, पुलिस का हर अगला कदम झारखंड की सियासत और नौकरशाही को झकझोरता चला गया।

ByThinkIndia.press Bureau
Published On 9 अग॰ 2026
सिलसिलेवार गिरफ्तारियाँ: OSD, बोर्ड अधिकारी, शिक्षक... पेपर लीक की जड़ तक पहुँची पुलिस
Representative Image [ThinkIndia.press Bureau]

Key Highlights

  • झारखंड पेपर लीक कांड पर विस्तृत और सच्ची रिपोर्टिंग।
  • दलालों, अधिकारियों और प्रिंटिंग प्रेस के बड़े गठजोड़ का खुलासा।
  • SIT की रिपोर्ट और गिरफ्तारियों पर एक्सक्लूसिव कवरेज।

रांची, 18 मार्च 2022: प्रिंटिंग प्रेस से मिले डिजिटल सुरागों ने जैसे-जैसे करवटें बदलीं, पुलिस का हर अगला कदम झारखंड की सियासत और नौकरशाही को झकझोरता चला गया। गिरफ्तारियों का जो सिलसिला एक मामूली दलाल से शुरू हुआ था, वह सीधे तत्कालीन शिक्षा मंत्री के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) तक जा पहुँचा। इस सिलसिले ने साबित कर दिया कि पेपर लीक कोई सड़क छाप गिरोह का काम नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में पनपा एक सुनियोजित सिंडिकेट था।

पहली बड़ी गिरफ्तारी हजारीबाग के ही एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल विमल साहू की हुई। साहू के दोनों मोबाइल फोन की जाँच में व्हाट्सएप पर ‘पेपर सॉल्यूशन’ नाम के आधा दर्जन ग्रुप मिले, जिनमें मैट्रिक के हर विषय के प्रश्नपत्रों की पीडीएफ सुबह-सुबह डाल दी जाती थी। साहू ने पूछताछ में बताया कि उसे ये पीडीएफ रांची के एक ‘सर’ भेजते थे, जिन्हें वह केवल ‘रंजीत भैया’ के नाम से जानता था। पुलिस ने जब रंजीत भैया की लोकेशन ट्रेस की, तो वह रांची के कोकर इलाके में बोर्ड के एक रिटायर्ड कर्मचारी का बेटा निकला। लेकिन असली चौंकाने वाला नाम तब सामने आया जब रंजीत ने बयान दिया कि उसे ये पेपर ‘मंत्री जी के दफ्तर’ से मिलते थे।

इस बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया। पुलिस ने जब दबाव बनाया तो रंजीत ने OSD अनुज कुमार सिंह (बदला हुआ काल्पनिक नाम) का नाम लिया। अनुज कुमार सिंह उस समय शिक्षा मंत्री के सबसे भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते थे। उनके खिलाफ सबूत इतने मजबूत थे कि रांची पुलिस को उन्हें सुबह 5 बजे उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार करना पड़ा। गिरफ्तारी के दौरान उनके घर से 1.2 करोड़ रुपये नकद, तीन लैपटॉप और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले। अनुज कुमार सिंह के लैपटॉप में बोर्ड के प्रश्नपत्रों की सैकड़ों फाइलें, उनके टाइम टेबल और परीक्षा केंद्रों की वह लिस्ट थी जिसे ‘सिक्योर हैंडलिंग’ के लिए केवल तीन अधिकारियों को जारी किया जाना था।

OSD की गिरफ्तारी के बाद जाँच का दायरा JAC के भीतर तक फैला। बोर्ड के तत्कालीन संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी और प्रश्नपत्र शाखा के प्रभारी महेश्वर उराँव को भी हिरासत में लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि प्रश्नपत्रों को ‘सीलबंद’ दिखाने की सारी प्रक्रिया महज एक औपचारिकता थी। ऑफिस में ही लिफाफों को भाप से खोलकर पेपर निकाले जाते थे, उनकी फोटोकॉपी होती थी और फिर उन्हें वापस इस कुशलता से पैक किया जाता था कि सील टूटी हुई नहीं लगती थी। इस पूरे खेल में कोरियर कंपनी के कर्मचारी तक शामिल थे, जो असली ट्रंक की जगह नकली ट्रंक परीक्षा केंद्रों पर भेज देते थे और असली प्रश्नपत्रों की तस्करी कर देते थे।

गिरफ्तारियों की यह कड़ी अभी खत्म नहीं हुई थी। इसके बाद राज्य के 6 जिलों से 32 कोचिंग सेंटर संचालक, 18 शिक्षक और कई बिचौलिए पकड़े गए। हर गिरफ्तारी के साथ यह साफ होता गया कि पेपर लीक सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित उद्योग था, जिसकी जड़ें सरकारी दफ्तरों के कोने-कोने में फैली थीं। पुलिस ने जब कोर्ट में इन सबकी पेशी कराई, तो रिमांड पेपर में लिखा एक वाक्य पूरे मामले की त्रासदी बयाँ कर रहा था – “आरोपियों ने बताया कि उन्हें कभी पकड़े जाने का डर नहीं था, क्योंकि ऊपर से लेकर नीचे तक सब सेटिंग थी।”

इस खबर को शेयर करें (Share this News)

इस खबर को शेयर करें

Logo

ThinkIndia.press Support

Bureau Desk Online

ThinkIndia Digital Bureau2026