पलामू जैसे बड़े जिले में किशोर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाना बड़ी जरूरत है। यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर गलत जानकारी किशोरों को डर, शर्म और जोखिम भरे व्यवहार की ओर ले जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में उम्र के अनुसार संवेदनशील संवाद होना चाहिए। इसमें स्वच्छता, माहवारी, शरीर में बदलाव, सहमति और सुरक्षित व्यवहार जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
इस तरह की जागरूकता का उद्देश्य अश्लीलता नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को सुरक्षित, स्वस्थ और जिम्मेदार बनाना है। परिवारों को भी सही जानकारी देने में सहयोग करना चाहिए।

