नई दिल्ली: मानवाधिकार से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा जरूरी, समय पर कार्रवाई से भरोसा बढ़ेगा। सामाजिक संगठनों और कानूनी जानकारों का कहना है कि दहेज, प्रेम विवाह, ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेल, घरेलू हिंसा और मानवाधिकार से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर सही जानकारी और सहायता तक पहुंच की है। कई बार पीड़ित परिवार बदनामी, डर या दबाव के कारण शिकायत नहीं करते, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है।
जानकारों के अनुसार किसी भी रिश्ते में सहमति, कानूनी उम्र, सम्मान और सुरक्षा बुनियादी शर्त हैं। शादी या प्रेम संबंध के नाम पर दबाव, धमकी, पैसे की मांग, निजी फोटो का दुरुपयोग, दहेज की मांग या शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में पीड़ित को सबूत सुरक्षित रखकर पुलिस, महिला हेल्पलाइन, साइबर सेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या भरोसेमंद परिजन से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
समाज की भूमिका भी अहम है। पंचायत, स्कूल, कॉलेज, परिवार और स्थानीय संस्थाएं अगर जागरूकता, काउंसलिंग और कानूनी जानकारी को बढ़ावा दें तो विवाद हिंसा या अपराध में बदलने से पहले रोके जा सकते हैं। संवेदनशील मामलों में पीड़ित की पहचान की गोपनीयता, निष्पक्ष जांच और मानवीय व्यवहार पर खास ध्यान देने की जरूरत है।

