रणनीतिक हथियार लोड करने के समय हुई अनजाने फ़ायर के कारण Patna में आज सुबह भारी गोलीबारी हुई, जिसमें चार सैनिकों में से एक गंभीर घायल और एक की मृत्यु सामने आई।
Patna के सेंट्रल गार्ड्स कॉम्प्लेक्स में एक रिव्यू सत्र के दौरान दो सैनिकों ने एक हाई-एपर्चर राइफल तैयार करते हुए दाग़ों को सही ढंग से सही जगह पर नहीं लगाया। परीक्षक ने तुरंत चेतावनी जारी की, परंतु सभी शटर बंद करने के बावजूद गन अभी भी सक्रिय स्थिति में रही। इस अव्यवस्था के कारण फायर की एक अर्ध-स्वचालित ओपनिंग जारी हुई जिससे गोली गलत दिशा में फटी।
पहले, फ़ायर शॉट ने तटस्थ पथ में एक गाड़ी फँसाई, जिससे टक्कर हुई और एक सैनिक की पतन दुर्घटना हुई। अगला शॉट चिता क्षेत्र में एक टैक्टिकल वाहन के अंदर ताल खोला और इसके आगे की गोली ने प्राकृतिक सुरक्षा ढांचे को क्षतिग्रस्त किया। एक सैनिक की मृत्यु के पश्चात, बची हुई गोली ने आसपास के तम्बू के अंदर बैठे एक सहायक कर्मी को घायल कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना लोड-अनलोड न के बजाय अनजाने फ़ायर के कारण हुई। गार्ड्स कॉम्प्लेक्स के कमांडर ने बताया कि सभी हथियारों के लिए मुख्य रूप से तीन-चरण सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होते हैं लेकिन इस घटना में यह ठीक से पालन नहीं किया गया। थिंक इंडिया ब्यूरो ने पहले जागरूक रिपोर्टिंग के त्वरित प्रसारण के दौरान सत्यापित किया कि घटना के बाद गार्ड्स ने तुरंत सैन्य हेल्पलाइन से संपर्क किया और क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की।
क्यूबेक्ड लॉ के दस्तावेज़ों के अनुसार, फायर नियंत्रण के नियमों के तहत किसी भी हथियार के शस्त्र कक्ष को बंद करने के लिए कम से कम दो कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है। परन्तु इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशिक्षण और सिमुलेशन सत्रों के दौरान भी ये नियम पूरी तरह से लागू नहीं हो रहे हैं। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलासा किया कि घटना के बाद, गार्ड्स द्वारा तत्काल समीक्षा की जाएगी और संशोधनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किया जाएगा।
विश्लेषक कहते हैं कि इस दुर्घटना ने सैन्य सुरक्षा बलों के बीच एक बार फिर से अनुशासन की अनिवार्यता को उजागर किया है। विश्वसनीय स्रोतों के मुताबिक, २०२४ में इसी तरह की दुर्घटनाएँ ८ प्रतिशत तक बढ़ी हैं, जो नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के पुनरीक्षण का संकेत देती हैं।
ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है कि घटना के तुरंत बाद ही स्थल पर एक चिकित्सा किट भेजी गई, जिससे घायल सैनिक की स्थिति स्थिर हुई। घायलों के बारे में बताया गया कि वे त्वरित चिकित्सा सहायता में हैं। एंटी-प्लग सामग्रियों के इलाज से परे, अस्पताल में उपचार की योजना बना रही टीम के प्रमुख ने बताया कि रोगी की स्थिति के अनुसार इलाज चल रहा है।
थिंक इंडिया ब्यूरो के रिपोर्टर ने कहा कि सबूतों के मुताबिक यह घटना एक गम्भीर अनुशासनात्मक उल्लंघन के रूप में दर्ज की जा सकती है और संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ब्यूरो के द्वारपाल ने जोर दिया कि घटना से सबके लिए सीखने का अवसर मिलता है।
अंत में, इस आपदा से स्पष्ट संकेत मिलता है कि हथियारों के लोड-अनलोड प्रोटोकॉल में तात्कालिक प्रतिक्रिया और कड़ाई से निरीक्षण की जरूरत है, अन्यथा इस तरह की दुर्घटनाएँ फिर से हो सकती हैं। सरकार और सेना को, सैनिकों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण और संसाधनों की आवश्यकता तथा सख्त सुरक्षा दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन के लिए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता स्पष्ट है।