गढ़वा जिले के विकास के नक्शे पर ऐसी कई लकीरें हैं जो बीच में ही टूट गई हैं। उन टूटी लकीरों में से एक है—केदुताल नाले पर बन रहा यह पुल। पिछले 10 वर्षों से इस पुल के तीन पिलर नदी के बीचों-बीच खड़े होकर सरकारी सिस्टम का मज़ाक उड़ा रहे हैं। यह पुल केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि 20 गांवों की उस उम्मीद का गला घोंटने वाला पत्थर है जो मानसून के दौरान मुख्यालय से पूरी तरह कट जाते हैं। एनआर डेली न्यूज़ की खोजी विकास रिपोर्ट।

सोन और कोयल के बीच का संघर्ष:
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि छोटी सी बारिश में भी नाले उफान पर आ जाते हैं। पुल न होने के कारण ग्रामीणों को 30 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। बीमार लोगों को अस्पताल पहुँचाना और बच्चों को स्कूल भेजना बारिश के तीन महीनों में एक बड़ी चुनौती बन जाता है। स्थानीय ग्रामीण रामेश्वर सिंह कहते हैं, "हर चुनाव में नेता आते हैं, नारियल फोड़ते हैं और चले जाते हैं। हमें लगता था कि अब किस्मत चमकेगी, पर 2016 के बाद से एक भी ईंट नहीं रखी गई।"

क्यों रुका है काम?
पड़ताल में पता चला कि इस पुल का टेंडर जिस कंपनी को दिया गया था, उसने 40% काम पूरा कर बीच में ही हाथ खड़े कर दिए। भुगतान में देरी और सामग्री की कीमतों में उछाल को कारण बताया गया। उसके बाद मामला कोर्ट और विभागीय जांच में ऐसा उलझा कि आज तक दोबारा टेंडर नहीं हो पाया। अब उन खड़े पिलरों में भी दरारें आने लगी हैं, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि अगर काम शुरू भी हुआ, तो यह पुराना ढांचा लोड सह पाएगा या नहीं।

भ्रष्टाचार की बू:
इस प्रोजेक्ट पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जा चुके हैं। लेकिन जो ढांचा खड़ा है, उसकी ज़मीनी कीमत आधी भी नहीं लगती। विडंबना देखिए कि जिस नदी पर यह पुल बन रहा है, उसी नदी से अवैध बालू खनन धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन विकास का पहिया थमा हुआ है। ग्रामीण अब इसे 'भ्रष्टाचार का स्मारक' कहने लगे हैं।

सरकार का जवाब:
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने नए सिरे से डीपीआर (Detailed Project Report) बनाकर मुख्यालय भेजी है। "जैसे ही फंड रिलीज़ होगा, हम काम चालू करेंगे," यह रटा-रटाया जवाब पिछले तीन सालों से हर पत्रकार को दिया जा रहा है। विधायक और सांसद भी इसे 'तकनीकी अड़चन' कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

निष्कर्ष:
गढ़वा में बुनियादी ढांचे की यह स्थिति यह दर्शाती है कि आम जनता की समस्याएं फाइलों के ढेर में कितनी तुच्छ हैं। एनआर डेली न्यूज़ प्रशासन से मांग करता है कि केदुताल पुल को प्राथमिकता दी जाए। एक पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ता, वह विकास को जनता की दहलीज तक पहुँचाता है। अगर मानसून से पहले काम शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीण जिला मुख्यालय पर महापड़ाव डालेंगे।