गढ़वा जिले की सबसे महत्वाकांक्षी कन्हर सिंचाई परियोजना पिछले 5 वर्षों से अधर में लटकी है। सुदूर गाँवों तक पानी पहुँचाने के दावों के बीच, भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों ने इस परियोजना की दिशा ही मोड़ दी है।
गढ़वा जिला एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, लेकिन यहाँ की खेती पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। इसी समस्या के समाधान के लिए 'कन्हर नदी सिंचाई पाइपलाइन परियोजना' की शुरुआत की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य जिले के हज़ारों एकड़ बंजर खेतों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था। लेकिन आज, करोड़ों रुपये की लागत वाली यह पाइपलाइन ज़मीन के नीचे केवल लोहा और कंक्रीट का ढेर बनकर रह गई है। एनआर डेली न्यूज़ की विशेष कृषि रिपोर्ट में आज हम इस परियोजना की विफलता के कारणों को खंगालेंगे।
योजना का स्वरूप:
कन्हर नदी से पानी खींचकर विभिन्न प्रखंडों के जलाशयों और फिर वहां से खेतों तक पाइपलाइन बिछाने की यह योजना झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थी। इसके तहत रंका, मेराल और रमुना के क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना था। काम कागजों पर तो 80% पूरा हो चुका है, लेकिन जब पानी छोड़ने की बारी आती है, तो पाइपलाइन आधा दर्जन जगहों पर फट जाती है।
भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री:
स्थानीय किसानों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। "पाइप इतनी पतली है कि पानी का दबाव झेल ही नहीं पाती। ठेकेदारों ने पैसे बचाने के लिए गहराई में पाइप नहीं डाली, जिसके कारण खेती के दौरान हल चलाने पर भी पाइप टूट जाते हैं," रंका के किसान जगन राम बताते हैं। कई जगहों पर एयर वॉल (Air Valve) ही नहीं लगाए गए, जिससे गैस बनने पर लाइन ब्लॉक हो जाती है।
प्रशासनिक लापरवाही:
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों का तर्क है कि ज़मीन अधिग्रहण और बिजली आपूर्ति में देरी के कारण पंप हाउस पूरी तरह से चालू नहीं हो पाए हैं। वहीं, सरकार की ओर से हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये जारी किए जाते हैं, जो बिना किसी सुधार के खर्च हो जाते हैं। हाल ही में हुई ऑडिट रिपोर्ट में भी वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है, लेकिन अभी तक किसी भी बड़े अधिकारी या ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई है।
किसानों का विरोध:
मेराल के आक्रोशित किसानों ने पिछले हफ्ते मुख्य मार्ग जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अगर खरीफ की फसल से पहले पानी नहीं मिला, तो वे सामूहिक आत्मदाह के लिए मजबूर होंगे। "हमें आश्वासन नहीं, केवल पानी चाहिए। हमारी ज़मीन और मेहनत सब बर्बाद हो रही है," एक किसान संघ के नेता का कहना है।
निष्कर्ष:
कन्हर परियोजना केवल एक सरकारी फाइल नहीं, बल्कि हज़ारों किसानों का सपना है। अगर इसे समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो गढ़वा में कृषि का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। एनआर डेली न्यूज़ सरकार से मांग करता है कि एक उच्च स्तरीय तकनीकी टीम गठित कर पाइपलाइन की गुणवत्ता की जांच की जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। किसानों की मेहनत का मज़ाक अब और नहीं सहा जाएगा।
