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गढ़वा की राजनीति में बड़ा उलटफेर: JMM और BJP के बीच जुबानी जंग तेज़, निकाय चुनाव ने बढ़ाई तपिश

रविवार, 12 अप्रैल 2026
garhwa
By NR Desk

नगर निकाय चुनावों की आहट के साथ ही गढ़वा में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भाजपा विधायक एसएन तिवारी और मुख्यमंत्री के बीच चल रहे कड़वाहट भरे बयानों ने चुनावी बिसात बिछा दी है। देखिए समीकरण कैसे बदल रहे हैं।

गढ़वा की राजनीति में इन दिनों शालीनता कहीं खो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर शुरू हो गया है। आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और झामुमो (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गढ़वा सीट, जो हमेशा से झारखंड की राजनीति का केंद्र रही है, वहां अब एक-एक वार्ड को जीतने के लिए हाई-लेवल रणनीतियां बनाई जा रही हैं।

भाजपा की रणनीति:
भाजपा के खेमे में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता "विकास बनाम भ्रष्टाचार" के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि राज्य सरकार गढ़वा के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और केंद्र की योजनाओं को धरातल पर आने से रोक रही है। तिवारी ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में कहा था, "गढ़वा की जनता देख रही है कि कैसे विकास के नाम पर केवल लूट मचाई जा रही है।"

झामुमो का पलटवार:
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ झामुमो का संगठन ज़मीनी स्तर पर काफी मज़बूत नज़र आ रहा है। झामुमो के नेताओं ने भाजपा पर केवल गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों में गढ़वा में जितनी सड़कें और पुल बने हैं, उतने पिछले 10 सालों में नहीं बने थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संभावित दौरे को लेकर झामुमो ने तैयारी ऐसी की है कि इसे आने वाले निकाय और आगामी विधानसभा चुनाव के शंखनाद के तौर पर देखा जा रहा है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण:
गढ़वा की राजनीति में जातीय समीकरणों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों के साथ दोनों दलों की बैठकें बंद कमरों में चल रही हैं। इस बार "साइलेंट वोटर" किसकी नैया पार लगाएगा, यह कह पाना मुश्किल है। खासकर युवाओं और महिला वोटरों को लुभाने के लिए सोशल मीडिया पर युद्ध छिड़ा हुआ है।

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी:
इन सबके बीच आम जनता के असली मुद्दे—महंगाई, बेरोजगारी और कार्यालयों में फैला भ्रष्टाचार—कहीं दबते नज़र आ रहे हैं। मतदाता अब चालाक हो गया है। वह रैलियों की भीड़ देखकर नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत हितों और विकास के कार्यों को तौलकर वोट करने का मन बना रहा है।

निष्कर्ष:
गढ़वा की यह राजनीतिक तपिश आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। जैसे-जैसे प्रत्याशियों की घोषणा होगी, वैसे-वैसे असली खेल शुरू होगा। एनआर डेली न्यूज़ हर राजनीतिक गतिविधि पर 'न्यूट्रल' और पैनी नज़र बनाए हुए है। हम आपको हर वार्ड और हर नेता की रिपोर्ट कार्ड से रूबरू कराते रहेंगे।

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NR Bureau is a senior intelligence correspondent for NR Global Agency, specializing in regional geopolitical developments and sociopolitical analysis.

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