गढ़वा जिले के सुदूरवर्ती प्रखंडों जैसे भंडरिया और धुरकी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। आधुनिक मशीनों पर धूल जमी है और मरीज़ों को मामूली इलाज के लिए भी 100 किमी दूर डाल्टेनगंज जाना पड़ रहा है।
झारखंड सरकार भले ही 'स्वास्थ्य सेवा आपके द्वार' जैसे नारे लगाती हो, लेकिन गढ़वा के ग्रामीण इलाकों में हकीकत काफी दर्दनाक है। भंडरिया ब्लॉक का वह छोटा सा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) जिसे मॉडल अस्पताल बनना था, आज वहां डॉक्टर की जगह गाय-बैल नज़र आते हैं। एनआर डेली न्यूज़ की खोजी टीम ने भंडरिया, रंका और धुरकी के स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया, जहां कई गंभीर खामियां सामने आईं।
डॉक्टरों की भारी कमी:
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भंडरिया PHC में तैनात डॉक्टर पिछले एक सप्ताह से नहीं आए हैं। अस्पताल एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी और एक संविदा नर्स के भरोसे चल रहा है। स्थानीय ग्रामीण बिरसा उरांव बताते हैं, "मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई, तो हम यहां आए, पर नर्स ने कहा कि यहां डॉक्टर नहीं हैं, डाल्टेनगंज ले जाओ। रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई।" यह केवल बिरसा की कहानी नहीं, हर दूसरे ग्रामीण की व्यथा है।
जर्जर मशीनें और दवाइयों का अभाव:
अस्पताल के एक्स-रे रूम में ताला लटका हुआ है और करोड़ों की मशीन पर धूल की मोटी परत जमी है। फ्रिज खराब होने के कारण बेसिक टीके (Vaccines) भी सुरक्षित नहीं रह पा रहे। ओपीडी में ज़रूरी दवाइयों जैसे पैरासिटामोल और एंटीबायोटिक्स तक का स्टॉक खत्म है। मरीज़ों को बाहर की दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
एंबुलेंस सेवा की विफलता:
सरकार की 108 एंबुलेंस सेवा ग्रामीण इलाकों में समय पर नहीं पहुँच पाती। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण और खराब सड़कों की वजह से चालक जाने से कतराते हैं। कई बार मरीज़ों को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।
प्रशासन का पक्ष:
सिविल सर्जन का कहना है कि जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है और ग्रामीण इलाकों में कोई डॉक्टर जाना नहीं चाहता। जो तैनात हैं, वे भी अक्सर ट्रेनिंग या निजी कारणों से अनुपस्थित रहते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अनुपस्थित डॉक्टरों का वेतन काटा जाएगा और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। लेकिन सवाल वही है कि क्या वेतन काटने से किसी की जान वापस आएगी?
निष्कर्ष:
ग्रामीण भारत की रीढ़ स्वास्थ्य सेवाएं हैं। अगर गढ़वा के सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था इसी तरह वेंटिलेटर पर रही, तो सरकार के विकास के दावे केवल कागज़ी साबित होंगे। एनआर डेली न्यूज़ मांग करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनिवार्य मौजूदगी और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ सेवा व्यापार नहीं, बुनियादी अधिकार है।
