ग्रामीण भारत में गर्भनिरोधकों को लेकर भ्रम बरकरार: 40% महिलाएँ अभी भी असुरक्षित तरीकों पर निर्भर
ग्रामीण भारत में 40% महिलाएँ अभी भी असुरक्षित गर्भनिरोधक तरीकों पर निर्भर। जानें क्या हैं बड़ी चुनौतियाँ और सरकार की नई पहल। Think India News।
पटना, 25 जुलाई 2026 (Think India News): एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने चिंताजनक तथ्य उजागर किया है कि ग्रामीण भारत में 40% से अधिक विवाहित महिलाएँ अभी भी गर्भनिरोधक के लिए असुरक्षित और अप्रभावी पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और राजस्थान के 500 गाँवों में कराए गए इस सर्वेक्षण में सामने आया कि नसबंदी के अलावा, कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग 15% से भी कम है, जबकि कॉपर-टी और इमरजेंसी पिल्स को लेकर भारी भ्रांतियाँ फैली हुई हैं।
सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु:
- 68% महिलाओं ने बताया कि उनके पति गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं।
- 52% महिलाओं का मानना है कि गर्भनिरोधक गोलियाँ बांझपन का कारण बनती हैं।
- केवल 12% किशोरियों ने स्कूल या स्वास्थ्यकर्मी से गर्भधारण रोकने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की थी।
प्रशासनिक पहल:
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन आँकड़ों पर चिंता जताते हुए 'सुरक्षित माँ, समृद्ध परिवार' नामक एक नया जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत आशा और आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल टूल्स के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की सही जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
सामाजिक बाधाएँ:
डॉ. रंजना कुमारी, जो एक सामुदायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं, ने Think India News को बताया, "समस्या सिर्फ जागरूकता की नहीं, बल्कि पितृसत्तात्मक सोच की है। जब तक महिलाओं को अपने शरीर और प्रजनन पर निर्णय का पूरा अधिकार नहीं मिलता, ये आँकड़े नहीं बदलेंगे।"

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