तकनीक और सेक्स: डेटिंग ऐप, सेक्सटिंग और डिजिटल खतरे
हैदराबाद। स्मार्टफोन ने जहां दुनिया को हमारी जेब में डाल दिया, वहीं प्रेम और यौन संबंधों के तौर-तरीके भी पूरी तरह बदल दिए। टिंडर, बम्बल और हिंज जैस...
हैदराबाद। स्मार्टफोन ने जहां दुनिया को हमारी जेब में डाल दिया, वहीं प्रेम और यौन संबंधों के तौर-तरीके भी पूरी तरह बदल दिए। टिंडर, बम्बल और हिंज जैसे डेटिंग ऐप भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। स्टेटिस्टा की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत में ऑनलाइन डेटिंग बाजार 28 करोड़ उपयोगकर्ताओं को पार कर गया। यह नई संस्कृति सुविधा तो देती है, लेकिन इसके साथ भावनात्मक और डिजिटल खतरों की एक पूरी फेहरिस्त भी जुड़ी है।
‘कैटफिशिंग’ (नकली प्रोफाइल से ठगी), ‘गोस्टिंग’ (बिना बताए गायब हो जाना) और ‘रिवेंज पोर्न’ अब आम बात हो गए हैं। साइबर अपराध विशेषज्ञ आशीष मेहरा बताते हैं, “सेक्सटिंग यानी यौन संदेश या तस्वीरें भेजना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन बिना सहमति या सुरक्षा के यह ब्लैकमेलिंग का सबसे बड़ा ज़रिया बन रहा है।” युवतियों के निजी वीडियो वायरल होने की घटनाएं लगभग हर सप्ताह सामने आती हैं, जिसके बाद पीड़िता का सामाजिक बहिष्कार और मानसिक आघात एक अलग त्रासदी है।
दूसरा पहलू है ‘डीपफेक’ तकनीक, जिससे किसी का चेहरा अश्लील वीडियो में जोड़ा जा सकता है। यह एक बिल्कुल नया सिरदर्द है, जिसका सामना आम आदमी से लेकर मशहूर हस्तियां कर रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल अंतरंगता के लिए ‘ट्रस्ट बट वेरिफाई’ का नियम अपनाना चाहिए। वीडियो कॉल पर भी अपनी सीमाएं तय करना, किसी भी तरह का संदेह होने पर स्क्रीनशॉट लेना, और तत्काल साइबर पोर्टल पर शिकायत करना ही आत्मरक्षा का एकमात्र उपाय है। सेक्स के साथ-साथ अब ‘डिजिटल सहमति’ की अवधारणा पर समाज को उतना ही गंभीर होना होगा, जितना भौतिक सहमति पर।

