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सुखलदरी जलप्रपात: कुदरत का करिश्मा, पर्यटन के विकास का इंतज़ार

रविवार, 12 अप्रैल 2026
garhwa
By NR Desk

गढ़वा जिले का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाला 'सुखलदरी' अपनी सुंदरता से किसी का भी मन मोह सकता है। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह अनमोल पर्यटन स्थल दम तोड़ रहा है। एक एक्सक्लूसिव ट्रैवल रिपोर्ट।

गढ़वा जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर धुरकी प्रखंड में स्थित 'सुखलदरी जलप्रपात' (Sukhaldari Waterfall) कुदरत का एक अनमोल तोहफा है। कनहर नदी के पत्थरों से टकराकर गिरता दूधिया पानी और चारों तरफ फैला घना जंगल यहाँ आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। लेकिन अफ़सोस, यहाँ आने वाला हर सैलानी इस सुंदरता के साथ-साथ यहाँ की बदहाली की कहानी भी साथ ले जाता है। एनआर डेली न्यूज़ की विशेष पर्यटन रिपोर्ट।

अछूता सौंदर्य:
सुखलदरी की सबसे बड़ी खासियत इसके पत्थरों की बनावट है। सालों से पानी के कटाव ने यहाँ की चट्टानों को ऐसी अद्भुत आकृतियां दी हैं जो किसी आर्ट गैलरी की तरह लगती हैं। सर्दियों और मानसून के दौरान यहाँ हज़ारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। लेकिन क्या यहाँ की सुंदरता को सहेजने के लिए कुछ किया गया है?

अभावों का अंबार:
हकीकत यह है कि यहाँ पहुँचने के लिए सड़क आज भी टूटी-फूटी है। पर्यटन स्थल पर न तो साफ़ शौचालय हैं, न बिजली की व्यवस्था और न ही ठहरने के लिए कोई गेस्ट हाउस। सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ कोई पुलिस चौकी या गार्ड नहीं है, जिससे शाम ढलते ही यहाँ वीराना छा जाता है। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने वाले कमरों (Changing Rooms) की कमी एक गंभीर समस्या है। "यहाँ सब कुछ भगवान भरोसे है। लोग यहाँ कचरा फेंकते हैं, पर सफाई का कोई ज़िम्मा नहीं लेता," एक पर्यटक विनीत बताते हैं।

रोज़गार की संभावना:
अगर सुखलदरी को 'इको-टूरिज्म' (Eco-Tourism) के रूप में विकसित किया जाए, तो मझिआंव और धुरकी के सैकड़ों स्थानीय युवकों को गाइड, होटल और अन्य माध्यमों से रोज़गार मिल सकता है। कनहर नदी में बोटिंग (Boating) और साहसिक खेलों (Adventure Sports) का विस्तार किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि वह इसे 'पर्यटन सर्किट' में शामिल कर एक सुनियोजित विकास योजना बनाए।

संरक्षण और नागरिक कर्तव्य:
पर्यटन को केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। यहाँ आने वाले सैलानियों को भी समझना होगा कि वे प्लास्टिक और शराब की खाली बोतलें यहाँ न फेंकें। प्रकृति की इस देन को गंदा करना हमारे पर्यावरण के खिलाफ अपराध है। स्थानीय युवा अब 'क्लीन सुखलदरी' अभियान शुरू करने की सोच रहे हैं।

निष्कर्ष:
सुखलदरी में वह क्षमता है कि वह गढ़वा को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर ला सके। ज़रूरत है केवल एक ईमानदार प्रशासनिक इच्छाशक्ति की। एनआर डेली न्यूज़ पर्यटन मंत्रालय से मांग करता है कि वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर इस जलप्रपात के कल-कल स्वर को सुनें और इसके विकास के लिए ठोस कदम उठाएं। हमारी धरोहर ही हमारी शान है।

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NR Bureau is a senior intelligence correspondent for NR Global Agency, specializing in regional geopolitical developments and sociopolitical analysis.

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