यौन रोग और यौन स्वास्थ्य समस्याएं: छुपाने से नहीं, इलाज से मिलेगा समाधान
जयपुर। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) या ईडी, शीघ्रपतन, वेजिनिस्मस और सेक्स के दौरान दर्द (डिस्पेर्यूनिया) – ये समस्याएं हर उम्र के व्यक्ति को प...

जयपुर। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) या ईडी, शीघ्रपतन, वेजिनिस्मस और सेक्स के दौरान दर्द (डिस्पेर्यूनिया) – ये समस्याएं हर उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन भारत में इन पर बात करने में लोग शर्म महसूस करते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक, देश में 30 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी यौन रोग से प्रभावित हो सकते हैं, फिर भी 90 प्रतिशत से अधिक रोगी इलाज के लिए आगे नहीं आते।
डॉ. अरुण गुप्ता, यूरोलॉजिस्ट, बताते हैं, “ईडी सिर्फ मनोवैज्ञानिक नहीं, बल्कि कई बार हृदय रोग, मधुमेह या हार्मोनल असंतुलन की शुरुआती चेतावनी होती है। इसे छुपाकर आप अपनी जान को खतरे में डाल रहे होते हैं।” शीघ्रपतन, जो कि 35 प्रतिशत पुरुषों को कभी न कभी प्रभावित करता है, का उपचार अब सिर्फ दवाओं से नहीं बल्कि विशेष व्यवहार थेरेपी और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ से भी संभव है। यह कोई ऐसी बीमारी नहीं जिसके लिए आजीवन दवा खानी पड़े।
महिलाओं में वेजिनिस्मस एक ऐसी स्थिति है जिसमें योनि की मांसपेशियां अनैच्छिक रूप से सिकुड़ जाती हैं, जिससे संभोग असंभव या अत्यधिक पीड़ादायक हो जाता है। यह कोई शारीरिक विकृति नहीं बल्कि अवचेतन मन का एक सुरक्षात्मक तंत्र है, जो अक्सर बचपन की यौन हिंसा, कठोर धार्मिक पालन-पोषण या सेक्स को ‘गंदा’ बताने वाली शिक्षा से उपजता है। इसका उपचार स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेक्स थेरेपिस्ट की संयुक्त मदद से संभव है, जिसमें डाइलेटर्स और काउंसलिंग का उपयोग किया जाता है।
भारत में सेक्स थेरेपी को लेकर अब भी जागरूकता का अभाव है। लोगों को लगता है कि यह सब ‘दिमागी खराबी’ है या किसी बाबा-तांत्रिक से ठीक हो सकता है। एक सर्वेक्षण में सामने आया कि लगभग 40 प्रतिशत यौन रोग के मरीज़ अपने इलाज के लिए पहले झोलाछाप डॉक्टरों या देसी नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिससे समस्या और बिगड़ जाती है।
गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर समस्याओं का इलाज सरल और सुरक्षित है। आधुनिक चिकित्सा में अब प्रोपराइटी-बेस्ड मेडिसिन, शॉकवेव थेरेपी, और लो-इंटेंसिटी लेज़र ट्रीटमेंट जैसे विकल्प उपलब्ध हैं जो बिना सर्जरी के राहत देते हैं। डॉ. मीरा कहती हैं, “यौन स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आपके हृदय या फेफड़ों का स्वास्थ्य। जब पैर में मोच आने पर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो यौन जीवन में समस्या आने पर चुप क्यों रहते हैं?” समाधान का पहला कदम है, शर्म का चश्मा उतारकर, अपने लिए मदद मांगना।
