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रजोनिवृत्ति और सेक्स: उम्र के साथ बदलता शरीर, बदलती इच्छाएं

पुणे। “बच्चे पैदा करने की उम्र निकल गई तो क्या सेक्स की ज़रूरत भी खत्म हो जाती है?” यह सवाल 45 पार की लाखों महिलाओं के मन में गूंजता है, लेकिन जुबा...

ByThinkIndia Global Bureau
Published On Aug 12, 2026
रजोनिवृत्ति और सेक्स: उम्र के साथ बदलता शरीर, बदलती इच्छाएं
Representative Image [ThinkIndia Global]

पुणे। “बच्चे पैदा करने की उम्र निकल गई तो क्या सेक्स की ज़रूरत भी खत्म हो जाती है?” यह सवाल 45 पार की लाखों महिलाओं के मन में गूंजता है, लेकिन जुबान पर नहीं आता। रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज़) शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की गिरावट का काल है, जो योनि में सूखापन, संभोग के दौरान दर्द और यौन इच्छा में कमी ला सकता है। लेकिन इसे यौन जीवन का अंत मान लेना पूरी तरह गलत है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेखा देशपांडे बताती हैं, “यह एक संक्रमण काल है, बीमारी नहीं।” हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT), लुब्रिकेंट्स और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ जैसे सरल उपाय महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता बदल सकते हैं। सबसे बड़ी बाधा समाज की वह मानसिकता है जो मां और दादी बन चुकी महिला को अलैंगिक मान लेती है। हिंदी सिनेमा में भी बड़ी उम्र के किरदारों की कामुकता को या तो हास्यास्पद दिखाया जाता है या नकार दिया जाता है।

वास्तविकता इसके विपरीत है। कई महिलाओं के लिए, गर्भधारण का भय खत्म हो जाने के बाद सेक्स जीवन अधिक संतोषजनक हो जाता है। पुरुषों में भी इस उम्र में टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिरता है, जिसे ‘एंड्रोपॉज़’ कहते हैं, जिससे कामेच्छा और स्टैमिना पर असर पड़ सकता है। इस दौर में खुले संवाद की आवश्यकता और बढ़ जाती है। जो जोड़े इस परिवर्तन को एक साथ समझते और स्वीकार करते हैं, वे अपने रिश्ते के दूसरे वसंत में प्रवेश कर सकते हैं।

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