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रमुना में समाज का दोहरा रवैया: झूठी शान के नाम पर कहीं जिंदा बेटी का 'अंतिम संस्कार', तो कहीं स्नेहा और रूपेश के 4 साल के प्यार की जबरन बलि

समाज का दोहरा मापदंड और संवेदनहीन रवैया एक बार फिर खुलकर सामने आया है, जहाँ झूठी शान और मर्यादा के नाम पर युवाओं की भावनाओं को बेरहमी से कुचला जा रहा है।

ByThinkIndia Global Bureau
Published On Jun 19, 2026
रमुना में समाज का दोहरा रवैया: झूठी शान के नाम पर कहीं जिंदा बेटी का 'अंतिम संस्कार', तो कहीं स्नेहा और रूपेश के 4 साल के प्यार की जबरन बलि
Representative Image [ThinkIndia Global]

आज के आधुनिक दौर में भी हमारा समाज अपनी रूढ़िवादी और खोखली मान्यताओं की बेड़ियों से बाहर नहीं निकल पाया है। समाज का यह दोहरा मापदंड और संवेदनहीन रवैया एक बार फिर खुलकर सामने आया है, जहाँ झूठी शान और मर्यादा के नाम पर युवाओं की भावनाओं को बेरहमी से कुचला जा रहा है।

हाल ही में रमुना (Ramna) में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। यहाँ एक लड़की ने जब अपनी पसंद के लड़के के साथ जीवन बिताने का फैसला लिया, तो घरवालों ने उससे सिंदूर लेने से ही मना कर दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई, परिवार और समाज के ठेकेदारों ने लड़की की भावनाओं का सम्मान करने के बजाय, उसके पुतले को जलाकर एक जिंदा लड़की का 'अंतिम संस्कार' कर दिया। इसके पीछे यह बेतुका तर्क दिया गया कि लड़की ने घर और समाज का नाम खराब किया है। इस कृत्य ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि खुदगर्जी में इंसान कितना गिर सकता है।

वहीं दूसरी ओर, एक और कहानी है जो इसी समाज की खामोशी और दोहरे रवैये पर तीखे सवाल उठाती है। यह कहानी है स्नेहा गुप्ता और रूपेश विश्वकर्मा की। इन दोनों के बीच पिछले 4 सालों से गहरा प्रेम था। इनके समर्पण का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्नेहा ने अपने प्यार को पाने के लिए 16 सोमवार के कठिन व्रत रखे। इतना ही नहीं, दोनों ने एक-दूसरे की सलामती और साथ के लिए 1 साल से ज़्यादा समय तक भगवान विष्णु का उपवास भी किया।

लेकिन, जब इनके इस पवित्र रिश्ते की भनक घरवालों को लगी, तो परिणाम क्या हुआ? घरवालों ने दोनों का एक-दूसरे से मिलना-जुलना पूरी तरह बंद करवा दिया। स्नेहा का फोन जब्त कर लिया गया, उसे घर की चारदीवारी में कैद कर दिया गया और आनन-फानन में बिना उसकी मर्ज़ी के उसकी शादी कहीं और तय कर दी गई। एक झटके में स्नेहा को रूपेश से हमेशा के लिए दूर कर दिया गया और समाज इस जबरन जुदाई पर खामोश तमाशा देखता रहा।

हम उसी जनता और समाज से यह पूछना चाहते हैं कि रमुना की उस लड़की और स्नेहा-रूपेश के मामले में यह कैसा दोहरा रवैया है? अगर युवा अपने प्यार के बारे में घर में सच बता दें (जैसा स्नेहा-रूपेश के साथ हुआ), तो उन्हें कैद कर दिया जाता है, उनका फोन बंद कर दिया जाता है और उनकी जबरन शादी कर दी जाती है। और अगर वे खुद से अपनी ज़िंदगी का फैसला ले लें (जैसा रमुना की घटना में), तो उन्हें जीते जी मार दिया जाता है, उनका पुतला जलाकर 'अंतिम संस्कार' कर दिया जाता है।

यह घटनाएं हमारे समाज के उस कड़वे सच का आइना हैं, जहाँ प्रेम आज भी सबसे बड़ा अपराध माना जाता है। आखिर कब तक झूठी शान के नाम पर बेटियों की खुशियों और युवाओं के सपनों की बलि चढ़ाई जाती रहेगी? क्या वाकई हम एक सभ्य समाज का हिस्सा हैं या सिर्फ दिखावे की आधुनिकता ओढ़े हुए हैं?

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