महिलाओं की सेक्स इच्छा

इंट्रो

महिलाओं की सेक्स इच्छा को लेकर कई भ्रांतियां हैं।

कोई कहता है महिलाओं को सेक्स में कम रुचि होती है।

कोई कहता है उम्र के साथ इच्छा खत्म हो जाती है।

लेकिन साइंस क्या कहता है?

ओवुलेशन पीरियड

महिलाओं की सेक्स इच्छा का सीधा संबंध उनके हार्मोन साइकिल से है।

डॉ. स्मिता पटेल बताती हैं:

ओवुलेशन के समय महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल सबसे ज्यादा होता है। यही वो वक्त होता है जब उनकी सेक्स इच्छा भी सबसे ज्यादा होती है।

ओवुलेशन पीरियड होता है - मेंस्ट्रुअल साइकिल के 12-16 दिन के बीच।

इमोशनल कनेक्शन

महिलाओं के लिए सेक्स सिर्फ फिजिकल नहीं, इमोशनल भी है।

जब वो इमोशनली कनेक्टेड महसूस करती हैं, तभी उनकी सेक्स इच्छा जागती है।

प्रिया (34 साल) कहती हैं:

जब मेरा पति मुझसे प्यार से बात करता है, मेरी बातें सुनता है, तो मैं उनके करीब आना चाहती हूं। जब वो इग्नोर करते हैं, तो मन नहीं करता।

स्ट्रेस फ्री दिन

स्ट्रेस का महिलाओं की सेक्स इच्छा पर गहरा असर होता है।

जब वो टेंशन फ्री होती हैं, तभी सेक्स के बारे में सोच पाती हैं।

फोरप्ले का महत्व

महिलाओं के लिए फोरप्ले बहुत जरूरी है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं - महिलाओं को उत्तेजित होने में पुरुषों से ज्यादा वक्त लगता है।

जल्दबाजी महिलाओं की सेक्स इच्छा को मार देती है।

पार्टनर का बिहेवियर

पार्टनर का बिहेवियर भी महिलाओं की इच्छा को प्रभावित करता है।

जो पुरुष अपनी पार्टनर की इच्छाओं का सम्मान करते हैं, उनके साथ महिलाएं ज्यादा इंटिमेट होना चाहती हैं।

उम्र का असर

महिलाओं की सेक्स इच्छा पर उम्र का भी असर होता है।

  • 20-30 साल: हार्मोन का पीक
  • 30-40 साल: करियर और बच्चों की वजह से कमी
  • 40-50 साल: पेरिमेनोपॉज के दौरान उतार-चढ़ाव
  • 50 के बाद: मेनोपॉज के बाद कमी

एक्सपर्ट की राय

डॉ. अंजलि वर्मा कहती हैं:

महिलाओं की सेक्स इच्छा को समझना है, तो सिर्फ फिजिकल नहीं, इमोशनल और मेंटल फैक्टर्स भी देखने होंगे। जब महिला इमोशनली सिक्योर होती है, तभी वो फिजिकली भी ओपन होती है।

सर्वे डेटा

  • 68% महिलाओं ने माना कि इमोशनल कनेक्शन से सेक्स इच्छा बढ़ती है
  • 72% ने कहा - फोरप्ले जरूरी है
  • 45% ने माना - ओवुलेशन पीरियड में इच्छा बढ़ती है
  • 58% ने कहा - स्ट्रेस से सेक्स इच्छा कम होती है

निष्कर्ष

महिलाओं की सेक्स इच्छा को समझना है, तो उन्हें सुनना होगा।

उनकी जरूरतें समझनी होंगी।

उन्हें इमोशनली सिक्योर करना होगा।

आप क्या सोचते हैं?

क्या आप इन बातों से सहमत हैं?