रिलेशनशिप काउंसलिंग कब जरूरी है?
इंट्रो
काउंसलिंग को लेकर लोगों में शर्म है।
लोग सोचते हैं - हमारे रिश्ते में कोई दिक्कत नहीं, हम खुद सुलझा लेंगे।
लेकिन कभी-कभी प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत होती है।
संकेत 1: बार-बार झगड़े
हर दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा।
एक ही बात पर बार-बार लड़ाई।
झगड़े के बाद सुलह नहीं हो पाती।
संकेत 2: सेक्स लाइफ खराब
सेक्स में रुचि खत्म हो गई है।
कभी-कभी महीनों तक कुछ नहीं होता।
इस बारे में बात करने में दोनों को अजीब लगता है।
संकेत 3: ट्रस्ट इशू
एक-दूसरे पर भरोसा नहीं रहा।
फोन चेक करना, शक करना, पूछताछ करना।
ट्रस्ट टूट चुका है और वापस नहीं बन पा रहा।
संकेत 4: कम्युनिकेशन गैप
बातचीत सिर्फ औपचारिकता रह गई है।
दिल की बातें शेयर नहीं होतीं।
चुप्पी बढ़ गई है।
संकेत 5: अलग होने का ख्याल
बार-बार मन में आता है - शायद अलग हो जाना चाहिए।
रिश्ता छोड़ने के बारे में सोचना।
लेकिन बच्चों, परिवार, समाज के डर से साथ रहना।
काउंसलिंग से क्या होता है?
डॉ. प्रीति सिंह बताती हैं:
काउंसलिंग का मतलब यह नहीं कि आपका रिश्ता खराब है। इसका मतलब है कि आप अपने रिश्ते को बेहतर बनाना चाहते हैं। एक न्यूट्रल इंसान आपको चीजों को नए नजरिए से देखने में मदद करता है।
काउंसलिंग के फायदे
- बिना झगड़े के बात करना सीखते हैं
- एक-दूसरे की जरूरतें समझते हैं
- पुराने घाव भरते हैं
- रिश्ते में नई एनर्जी आती है
सर्वे डेटा
- 68% कपल्स जो काउंसलिंग कराते हैं, उनका रिश्ता बच जाता है
- 72% ने माना कि काउंसलिंग से बात करने का तरीका बदल जाता है
- 58% ने कहा - पहले शर्म लगती थी, बाद में अच्छा लगा
- 65% ने माना कि काउंसलिंग के बाद रिश्ता पहले से बेहतर हो जाता है
निष्कर्ष
काउंसलिंग में शर्म की कोई बात नहीं।
जैसे बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही रिश्ते की बीमारी पर काउंसलर के पास जाएं।
आप क्या सोचते हैं?
क्या आप कभी काउंसलिंग कराएंगे?
