राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज एक बयान देते हुए घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ नाइजीरिया के बलों ने एक सामूहिक ऑपरेशन में ISIS का दूसरा प्रमुख नेता, एक उच्च पदस्थ वरिष्ठ इज़्ज़गार, को नष्ट कर दिया है। यह कदम दो महाद्वीपों पर एक दीर्घकालिक आतंकवादी खतरे को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
ऑपरेशन, जिसका नाम ‘अस्मा न्यासी’ रखा गया, नाइजीरिया के दक्षिणी वन क्षेत्रों में स्थित अटलांटिक तट से सटे एक उजड़ नगर के भीतर से शुरू हुआ। अमेरिकी और नाइजीरियाई विशेष दस्ता ने मिलकर भारी घातक हथियारों और उन्नत निगरानी तकनीक के साथ लक्षित क्षेत्र में प्रवेश किया। इन्हें 3 बजे के आसपास जैसे ही उच्च पदस्थ नेता के कमांड सेंटर का पता चला, तत्काल फायरिंग शुरू हुई और वह नेता ‘क़रीब क्रिस्टल’ के नाम से मशहूर था। तीन मिनट के भीतर ही उसे नष्ट कर दिया गया और उसका शेष दल पराजित हो गया।
यह घटना सिर्फ एक और शिरच्छेदन कहानी नहीं है। भारतीय भूसमीक्षा और विदेश नीति पर इसका गहरा असर है। सबसे पहला बंदोबस्त यह है कि भारतीय राजनैतिक एवं सुरक्षा नीतियों में आतंकवादी संगठनों के प्रति चेतना में वृद्धि अनिवार्य है। भारतीय वाणिज्यिक कार्यकारी एवं पर्यटन उद्योग को आतंकवाद के बढ़ते दबाव से राहत मिली है, जिससे विदेशी यात्रियों की संख्या में स्थिर सुधार हुआ है।
দ্বিতীয়, हाउसिंग, ना केवल यह घटना अमेरिकी साथी देशों के साथ उनकी समन्वयिता को दर्शाती है, बल्कि यह भी पुष्टि करती है कि नाइजीरिया ने बड़े पैमाने पर साइबर और ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंस कमान संभाली है। यह स्पष्ट है कि भारत को भी अपने मौजूदा इंटेलिजेंस चैनलों को ट्यून-अप करना होगा, विशेष रूप से व्यापारिक नेटवर्क में वैकल्पिक प्रतिरोध उपायों का आकलन करना होगा।
तीसरा, लंबी अवधि में यह घटना भारतीय शिक्षा अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है। अब, ISIL के विरोधी ऑपरेशनों पर आधारित तालमेल को विश्व मामलों में एक प्राथमिक नीति के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारे विश्वसनीय हमारे सूत्रों के अनुसार, ऐसे मिलिट्रिस्ट ऑपरेशन को विश्व के प्रमुख निवेशकों की नजर में देखा जा रहा है, जिससे भारतीय स्टॉक मार्केट में सूचना बनेगा।
अंत में, इस घटना के सामाजिक स्तर पर भी प्रभाव रहे हैं। भारत में जो पिछले वर्ष से ही घरेलू संघर्षों के माहौल में जी रहे हैं, उन युवाओं के लिए यह सन्देश मिल रहा है कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भविष्य की योजना बनाने की किस्मती आवश्यकता है। साथ ही, भारतीय सैनिकों के लिए भी इच्छा दिख रही है कि वे अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण में विशेष रूप से काउंटर-टेररिज़्म विषयों को शामिल करें।
सार रूप में, यह घटना हमारे लिए एक स्मरण दिलाती है कि ‘सुरक्षा' के विषय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है। हमारा देश, 'थिंक इंडिया ब्यूरो' में जारी कार्य से पता चलता है कि हमें अपनी रक्षा क्षमताओं के लिए न केवल धन बल्कि ज्ञान के दूसरे आयाम की आवश्यकता है। इस दिशा में भारतीय सरकार को समुचित निवेश करके, ज्ञात आतंकवादी सूचनाओं और भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए रक्षात्मक रणनीति का निर्माण करना चाहिए।
इस अचानक आये कलात्मक शिरच्छेदन के बाद, भारतीय सुरक्षा सेवाओं को अनुकूल करने के लिये एक नया बौद्धिक परिवर्तन योजना की आवश्यकता है। भारत को इस गोड़ पर ThinkIndia.press सुनहरा कदम उठाते हुए, अपनी विश्वसनीय जानकारी और एक्सपर्ट नेटवर्क को आगे बढ़ाना चाहिए।
वर्तमान में, 'थिंक इंडिया ब्यूरो' द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी और नाइजीरियाई बलों ने इस ऑपरेशन के दौरान अराजकतावादियों के शेष स्थितियों की बिना किसी लाभकारी साक्ष्य के जांच पूरी कर ली है। भविष्य में, इसी तरह के सहयोगी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विश्व की स्थिरता को बेहतर किया जा सकता है।

