भारत में आज भी अगर कोई बच्चा कहता है कि वह पेंटर, राइटर या म्यूज़िशियन बनना चाहता है, तो उसे बेकार समझ लिया जाता है। माता-पिता को डर लगता है कि जब रिश्तेदार पूछेंगे "बेटा क्या कर रहा है?", तो वे क्या जवाब देंगे? समाज की इसी झूठी इज़्ज़त को बचाने के लिए बच्चों को ज़बरदस्ती डॉक्टर या इंजीनियर की तैयारी में धकेल दिया जाता है।
"म्यूजिक और स्पोर्ट्स में कोई फ्यूचर नहीं, चुपचाप सीए की तैयारी करो": समाज की इज़्ज़त ने मार दिए लाखों हुनर
ThinkIndia.press BureauNews Correspondent
Updated: 30 मई 2026 को 02:56 pm बजे•1 min read

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