भारत में आज भी अगर कोई बच्चा कहता है कि वह पेंटर, राइटर या म्यूज़िशियन बनना चाहता है, तो उसे बेकार समझ लिया जाता है। माता-पिता को डर लगता है कि जब रिश्तेदार पूछेंगे "बेटा क्या कर रहा है?", तो वे क्या जवाब देंगे? समाज की इसी झूठी इज़्ज़त को बचाने के लिए बच्चों को ज़बरदस्ती डॉक्टर या इंजीनियर की तैयारी में धकेल दिया जाता है।