स्वामी विवेकानंद के अनुसार असली धर्म यह नहीं है कि आप रोज़ मंदिर जाएं। असली धर्म है— भूखे को खाना खिलाना, किसी रोते हुए को हंसाना और अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए काम करना। धर्म कोई लिबास नहीं, बल्कि आपके जीने का तरीका है।
क्या मंदिर जाना और पूजा-पाठ करना ही असली धर्म है? स्वामी विवेकानंद के अनुसार जानें धर्म की वास्तविक परिभाषा
ThinkIndia.press BureauNews Correspondent
Updated: 30 मई 2026 को 02:56 pm बजे•1 min read

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